Maa Baglamukhi Temple

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हिमाचल प्रदेश में बहुत से मंदिर हैं जिनमें से नौबाही देवी का मंदिर भी शामिल है । हिमाचल प्रदेश के सरकाघाट से लगभग ४ (4) किलोमीटर की दूरी पर माता श्री नौबाही देवी का भव्य मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में प्रदेश से ही नहीं बल्कि बाहर राज्यों से भी अनेक श्रद्धालु आते हैं। मंदिर के इतिहास के ऊपर नज़र डालें तो इसका इतिहास बहुत पुराना है। खुदाई के दौरान मिली पत्थर की विशाल शिलायें मंदिर परिसर में देखी जा सकती हैं। १३ (13) वीं शताब्दी में बना नौबाही देवी का मंदिर जिसके बारे में मंदिर के नामकरण के बारे में अनेक धारणायें हैं। हजारों वर्ष पूर्व यहां घना जंगल हुआ करता था, जिसमें नाम मात्र कीआबादी हुआ करती थी। चूड़ियां बेचने वाले को बंजारे को एक बार इस स्थान पर छोटी सी लड़की मिली। लड़की ने आवाज दी ओ बंजारे मुझे भी चूड़ियां पहना दे, बंजारा लड़की को चूड़ियां पहनाने लगा, परन्तु जब उस चमत्कारी लड़की ने एक-एक करके अपनी सौ भुजायें आगे बढ़ाई तो बंजारा हतप्रभ रह गया। लड़की ने बाजार से कहा की घबराओ मत मैं नवदुर्गा नौबाही माता हूँ। उस कन्या ने चूड़ियों के बदले कुछ छोटे-छोटे पत्थर बनजारे के हाथ मैं रख दिए। बंजारा घर चला गया जब उसने देखा तो वह पत्थर सोने के हो गए थे। जब बंजारे ने इस घटना का जिक्र लोगो से किया तो लोगो ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। आज यह शक्तिपीठ देश प्रदेश में अपनी पहचान बनाये हुये है। माता श्री नौबाही देवी मंडी, हमीरपुर तथा बिलासपुर के ज्यादातर परिवारों की कुल देवी हैं। मुगलों के शाशन काल में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला कर दिया था तथा मंदिर को तोड़ने और लूटने का प्रयास किया था तो, माता ने उस पर पत्थरों के गोले बरसाए। गजनवी को सेना सहित इस मंदिर से भागना पड़ा। मंदिर में माता की भिन्न-भिन्न स्थापित होने के साथ साथ लगता एक तालाब भी है। कुछ समय पहले इस तालाब में बहुत से कमल के फूल खिले रहते थे जोकि अब पानी के आभाव के कारण नष्ट हो गए हैं। हर वर्ष आषाढ़ संक्रांति पर यहां मेला लगता है ओर भक्त माता के दर्शन पाते हैं। सन १९५१-५२ (1951-52) में मंडी के राजा द्वारा यहां पर किये जाने वाले मेले को बंद करवाने से वह अँधा हो गया था। पुरोहितों ने राजा को बताया की माता की नाराजगी के कारण तुम्हारा यह हाल हुआ है। राजा ने माता से माफ़ी मांगी और उसकी आँखों की रौशनी लौट आई।

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