आरती श्री सत्यनारायण जी की

भगवान सत्यनारायण जी की आरती जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा। सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥ जय लक्ष्मीरमणा। श्री जय लक्ष्मीरमणा। रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे। नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे॥ जय लक्ष्मीरमणा। श्री जय लक्ष्मीरमणा। प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो। बूढ़ो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो॥ जय लक्ष्मीरमणा। श्री जय लक्ष्मीरमणा। दुर्बल…

करवा चौथ व्रत

करवा चौथ व्रत हिंदू सनातन धर्म में करवा चौथ सुहागिनों का एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इस त्योहार पर महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी लगाकर, चूड़ियां पहन कर व सोलह श्रृंगार कर अपने पति की पूजा कर व्रत का पारायण करती हैं। वह अपने सुहाग (पति) की दीर्घायु के लिए इस व्रत को करती…

आरती कुंजबिहारी जी की

आरती कुंजबिहारी जी की आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला । श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ॥  श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥  गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लटन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक ललित…

वट वृक्ष (बरगद) की पूजा

वट वृक्ष (बरगद) की पूजा इस वृक्ष में भगवान व्रह्मा, भगवान विष्णु, भगवान महेश और भगवान शिव भी वास करते है। इस वृक्ष की पूजा माता तुलसी,धर्मवृक्ष (पीपल) के समान की जाती है। वट (बरगद) के वृक्ष को हिन्दू धर्म में बहुत प्रकार के व्रत,त्योहारों में इसकी पूजा की जाती है। इसलिए इस वृक्ष को…

आरती युगलकिशोर जी की

भगवान कृष्ण की आरती आरती युगलकिशोर की कीजै,राधेतन मन धन न्यौछावर कीजै।। आरती युगलकिशोर की कीजै। रवि शशि कोटि बदन की शोभा, ताहि निरखि मेरो मन लोभा।। आरती युगलकिशोर की कीजै,राधेतन मन  धन न्यौछावर कीजै। गौरश्याम मुख निरखन लीजै, हरि का स्वरूप नयन भरि पीजै।।  आरती युगलकिशोर की कीजै,राधेतन मन धन न्यौछावर कीजै। ओढ़े नील पीत…

पीपल की पूजा

पीपल की पूजा और पीपल के वृक्ष का प्रमुख महत्व भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं को वृक्षों में पीपल बताया है। ऋग्वेद में पीपल के वृक्ष को देव रूप में दर्शाया गया है। यजुर्वेद में यह हर यज्ञ में प्रयोग करने के लिए बताया गया है। अथर्ववेद में कहा है की इसमें समस्त देवता निवास…

आरती गायत्री माता जी की

गायत्री माता जी की आरती जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जग पालन कर्त्री।। दुःख शोक भय क्लेश कलह दारिद्र्य दैन्य हर्त्री।।१।। जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। ब्रह्मरूपिणी, प्रणत पालिनी, जगत धातृ अम्बे। भव-भय हारी, जन हितकारी, सुखदा जगदम्बे।।२।। जयति जय गायत्री माता, जयति जय…

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सावन के सोमवार व्रत

सावन के सोमवार व्रत सतयुग काल में सनत कुमारों ने एक बार भगवान् महादेव शिव से श्रावण महीने के महात्मय के बारे में पूछा और यह भी जिज्ञासा प्रकट की कि उन्हें यह महीना क्यों प्रिय है? भोलेनाथ ने इसका अर्थ समझाते हुए उनको एक कथा सुनाई। जिसमें कथा के अनुसार देवी सती ने अपने…